81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायकों का समर्थन होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा राज्यसभा चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सके. दूसरी ओर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पार्टी के प्रत्याशी बैजनाथ राम को राज्यसभा भेजने में सफल रहे. झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैजनाथ राम को कुल 31 मत प्राप्त हुए.
वहीं, एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को प्रथम वरीयता के 28 वैध वोट मिले, जो उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त साबित हुए. नाथवानी को कुल 30 वोट मिले थे, लेकिन इनमें से दो मत अमान्य घोषित कर दिए गए. इसके अलावा एक अन्य वोट भी रद्द हुआ, हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि वह मत किस उम्मीदवार के पक्ष में डाला गया था.
मतगणना के नतीजों के बाद क्रॉस वोटिंग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. चुनाव प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले एनडीए और भाजपा के विधायकों ने मतदान किया, जबकि अंतिम वोट मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने डाला. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी मतदान में हिस्सा लिया. राज्यसभा चुनाव में सभी 81 विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.
अंतिम परिणामों के अनुसार तीन वोट अमान्य पाए गए. शेष 78 वैध मतों में से बैजनाथ राम को 31, परिमल नाथवानी को 28 और कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को केवल 20 वोट मिले. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमान्य घोषित तीन मतों में दो एनडीए और एक कांग्रेस खेमे से जुड़े थे.
चुनाव परिणामों ने संभावित क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि सत्तारूढ़ गठबंधन के कुछ विधायकों ने निर्धारित लाइन से हटकर मतदान किया, जिससे चुनावी परिणाम प्रभावित हुए.













