रांची: कांग्रेस भवन, रांची में झारखंड आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष राज उरांव की अध्यक्षता में विश्व आदिवासी दिवस बड़े उत्साह, गरिमा और सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाया गया. कार्यक्रम में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा, पहचान और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण का संकल्प दोहराया गया.
केशव महतो कमलेश रहे मुख्य अतिथि
समारोह में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और अधिकारों के संरक्षण की आवश्यकता पर अपने विचार रखे.
वहीं, आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम चंद मुर्मू ने मुख्य वक्ता के रूप में कार्यक्रम को संबोधित किया. उन्होंने आदिवासी समाज की पहचान, विरासत और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए.
राज उरांव की अध्यक्षता में जुटे कांग्रेस नेता और सामाजिक कार्यकर्ता
विश्व आदिवासी दिवस के इस विशेष आयोजन का नेतृत्व Jharkhand Adivasi Congress के चेयरमैन राज उरांव ने किया. उनके नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, पार्टी कार्यकर्ताओं, आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों और सामाजिक साथियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया. कार्यक्रम के माध्यम से आदिवासी समाज की एकता, सांस्कृतिक विरासत और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया.
आदिवासी संस्कृति और परंपरा की दिखी शानदार झलक
कार्यक्रम में आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और रंगारंग कार्यक्रम समारोह का प्रमुख आकर्षण रहे. आदिवासी परंपरागत गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे कांग्रेस भवन परिसर को उत्साह और उमंग से भर दिया.
पारंपरिक गीतों पर उपस्थित लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा और पहचान का गौरवपूर्ण प्रदर्शन किया.
संस्कृति, अधिकार और संविधान के प्रति एकजुटता का संकल्प
राज उरांव की अध्यक्षता में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस समारोह ने आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और अधिकारों के प्रति एकजुटता को और मजबूत किया. आयोजन के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों तक आदिवासी विरासत को पहुंचाने और संविधान में प्रदत्त अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया. समारोह ने यह संदेश भी दिया कि आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए सामाजिक एवं राजनीतिक स्तर पर एकजुट प्रयास आवश्यक हैं.













