रांचीः राजनीति की दुनिया में फैसले, रणनीति और संघर्ष आम बात हैं. लेकिन कुछ ऐसे पल भी आते हैं, जब पद और राजनीति पीछे छूट जाती है और सामने रह जाता है सिर्फ इंसान. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ भी रविवार को कुछ ऐसा ही हुआ.
मंत्री सुदिव्य कुमार के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने गिरिडीह पहुंचे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एक बेहद भावुक क्षण में खुद को संभाल नहीं सके. सुदिव्य कुमार की पत्नी के आंसुओं और उनके गहरे दुख को देखकर मुख्यमंत्री की आंखें भी नम हो गईं.
सुदिव्य कुमार की पत्नी को देखकर भावुक हुए हेमंत सोरेन
सुदिव्य कुमार के अंतिम संस्कार के दौरान माहौल पहले से ही गमगीन था. परिवार के सदस्यों का दर्द और अपनों को खोने का सदमा हर चेहरे पर साफ नजर आ रहा था. इसी दौरान जब हेमंत सोरेन की नजर सुदिव्य कुमार की पत्नी पर पड़ी, तो वह कुछ पल के लिए बेहद भावुक हो गए.
एक तरफ मुख्यमंत्री के रूप में उनके सामने जिम्मेदारियां थीं, लेकिन उस वक्त एक करीबी के निधन का दर्द तमाम राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर भारी पड़ता नजर आया। वह अपने आंसुओं को रोक नहीं सके.
जब शब्द कम पड़ गए और आंखों ने कह दिया सबकुछ
कुछ दुख ऐसे होते हैं, जिनके सामने शब्द भी बेबस हो जाते हैं. सुदिव्य कुमार के परिवार के बीच मौजूद हेमंत सोरेन का भावुक होना भी ऐसा ही एक पल था.
उन्होंने परिवार को सांत्वना देने की कोशिश की, लेकिन शायद उस दुख के सामने कहने के लिए शब्द पर्याप्त नहीं थे. गले में रुंधी आवाज और आंखों से छलकते आंसुओं ने वह बात कह दी, जिसे किसी राजनीतिक बयान या भाषण में व्यक्त करना संभव नहीं था.
यह सिर्फ एक नेता के भावुक होने का दृश्य नहीं था, बल्कि उस रिश्ते और संवेदना की झलक थी, जो राजनीतिक पहचान से कहीं आगे होती है.
अंतिम यात्रा में हेमंत सोरेन ने दिया कंधा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सुदिव्य कुमार की अंतिम यात्रा में भी शामिल हुए. उन्होंने पार्थिव शरीर को कंधा दिया और अंतिम यात्रा में परिवार के साथ श्मशान घाट तक पहुंचे.
इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे. पूरे माहौल में शोक और सन्नाटा पसरा रहा. सुदिव्य कुमार के निधन ने झारखंड की राजनीति के साथ-साथ उनके समर्थकों और परिचितों के बीच भी गहरा शोक पैदा किया है.
राजनीति से अलग नजर आया हेमंत सोरेन का मानवीय चेहरा
राजनीति में नेताओं को अक्सर उनके फैसलों, बयानों और राजनीतिक रणनीतियों के आधार पर देखा जाता है. हेमंत सोरेन भी झारखंड की राजनीति में एक मजबूत और निर्णायक नेता के तौर पर पहचाने जाते हैं.
लेकिन गिरिडीह में सामने आया यह दृश्य राजनीतिक पहचान से बिल्कुल अलग था. यहां मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि दुख में खड़ा एक इंसान नजर आया.
सुदिव्य कुमार के परिवार के दुख को देखकर हेमंत सोरेन की आंखों से निकले आंसुओं ने यह दिखाया कि सार्वजनिक जीवन में कठोर फैसले लेने वाला व्यक्ति भी निजी और मानवीय क्षणों में भावनाओं से अछूता नहीं होता.
आंसुओं ने खींच दी राजनीति और इंसानियत के बीच एक अलग तस्वीर
हेमंत सोरेन का यह भावुक रूप भी इसी मानवीय पक्ष को सामने लाता है. सियासत में आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक संघर्ष लगातार चलते रहते हैं. लेकिन किसी अपनों के जाने का दर्द उन सभी सीमाओं को कुछ देर के लिए मिटा देता है.
गिरिडीह का यह दृश्य भी कुछ ऐसा ही था—जहां एक मुख्यमंत्री की आंखों में आंसू थे और सामने था एक परिवार का गहरा दुख.
शायद यही वजह है कि उस पल को किसी राजनीतिक बयान की जरूरत नहीं पड़ी. हेमंत सोरेन की आंखों से छलके आंसुओं ने ही बहुत कुछ कह दिया.













