भारतीय क्रिकेट में टीम इंडिया तक पहुंचना किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद खास उपलब्धि होती है. घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बाद जब किसी खिलाड़ी को राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहनने का मौका मिलता है, तो उससे लंबे करियर की उम्मीद की जाती है. हालांकि, हर खिलाड़ी की कहानी इतनी आसान नहीं होती.
कुछ क्रिकेटरों को भारत की ओर से खेलने का मौका मिला, उन्होंने अपनी क्षमता भी दिखाई, लेकिन इसके बाद उन्हें दोबारा राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिल सकी. किसी के सामने टीम में कड़ी प्रतिस्पर्धा थी, तो किसी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. वहीं, कुछ खिलाड़ियों के रास्ते में फिटनेस और टीम कॉम्बिनेशन जैसी चुनौतियां भी आ गईं.
1. फैज फजल
विदर्भ के अनुभवी बल्लेबाज फैज फजल को घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन का इनाम साल 2016 में मिला. उन्हें जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे सीरीज के दौरान भारतीय टीम में शामिल किया गया और हरारे में उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की. फजल ने डेब्यू मैच में ही अपनी बल्लेबाजी का दम दिखाया. उन्होंने बिना आउट हुए 55 रन बनाए और भारत की जीत में अहम योगदान दिया। भारतीय टीम ने यह मुकाबला 10 विकेट से अपने नाम किया.
दिलचस्प बात यह रही कि इतनी शानदार शुरुआत के बावजूद फजल को इसके बाद भारत की वनडे या टी20 टीम में दोबारा खेलने का मौका नहीं मिला. इस तरह उनका अंतरराष्ट्रीय करियर सिर्फ एक वनडे तक ही सीमित रह गया.
2. सुदीप त्यागी
उत्तर प्रदेश के तेज गेंदबाज सुदीप त्यागी ने घरेलू क्रिकेट में अपनी तेज रफ्तार और गेंद को स्विंग कराने की क्षमता से पहचान बनाई थी. इसी प्रदर्शन के दम पर उन्हें साल 2009 में भारतीय टीम में जगह मिली.
त्यागी ने श्रीलंका के खिलाफ वनडे मुकाबले से इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखा। हालांकि, डेब्यू मैच उनके लिए यादगार नहीं रहा. उन्होंने अपने स्पेल में 63 रन खर्च किए, लेकिन कोई विकेट हासिल नहीं कर सके.
इसके बाद भारतीय टीम के तेज गेंदबाजी आक्रमण में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और फिटनेस से जुड़ी परेशानियों ने उनकी राह मुश्किल कर दी. नतीजा यह रहा कि त्यागी को दोबारा टीम इंडिया की वनडे जर्सी पहनने का अवसर नहीं मिला.
3. रोबिन सिंह जूनियर
रोबिन सिंह जूनियर उन खिलाड़ियों में शामिल रहे, जिन्हें घरेलू क्रिकेट के प्रदर्शन के आधार पर भारतीय टीम में जगह मिली. बाएं हाथ के तेज गेंदबाज ने साल 1999 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न में अपना पहला और आखिरी वनडे मैच खेला.
उस मुकाबले में रोबिन सिंह जूनियर गेंद से प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे. उन्होंने 7 ओवर में 51 रन दिए और उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला.
डेब्यू मैच के बाद चयनकर्ताओं ने उन्हें टीम से बाहर कर दिया. इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में वापसी का अवसर नहीं मिल पाया और उनका अंतरराष्ट्रीय करियर महज एक वनडे मुकाबले तक सिमट गया.
4. पंकज धर्माणी
पंजाब के विकेटकीपर-बल्लेबाज पंकज धर्माणी ने भी घरेलू क्रिकेट में अपने प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम में जगह बनाई थी. साल 1996 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जयपुर में उन्हें वनडे डेब्यू करने का मौका मिला.
धर्माणी को इस मुकाबले में छठे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतारा गया, लेकिन वह बड़ी पारी नहीं खेल सके और सिर्फ 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गए.
इसके बाद भारतीय टीम में विकेटकीपर की भूमिका के लिए नयन मोंगिया की वापसी ने धर्माणी की संभावनाओं को और सीमित कर दिया. वह दोबारा भारतीय टीम का हिस्सा नहीं बन सके और उनका इंटरनेशनल करियर भी केवल एक वनडे मैच तक ही रह गया.
एक मैच, लेकिन टीम इंडिया की जर्सी पहनने का गौरव
इन चारों खिलाड़ियों की कहानी यह बताती है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जगह बनाना जितना मुश्किल है, उसे बरकरार रखना उससे भी बड़ी चुनौती है. किसी को डेब्यू पर शानदार प्रदर्शन के बावजूद दूसरा मौका नहीं मिला, तो किसी का पहला मैच ही उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका. इन खिलाड़ियों के नाम भले ही भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े सितारों में शामिल न हों, लेकिन टीम इंडिया की जर्सी पहनने का गौरव उनके करियर की ऐसी उपलब्धि है, जिसे हमेशा याद किया जाएगा.













