रांची: लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के शीर्ष कमांडर और दो करोड़ रुपये के इनामी मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता माना जा रहा है. अदालत द्वारा 14 दिनों की पुलिस रिमांड मंजूर किए जाने के बाद जांच एजेंसियां उससे गहन पूछताछ की तैयारी में जुट गई हैं. अधिकारियों का मानना है कि इस दौरान माओवादी संगठन के नेटवर्क, वित्तीय तंत्र और हथियारों की सप्लाई से जुड़े कई अहम राज सामने आ सकते हैं.
सहयोगियों से भी होगी समानांतर पूछताछ
मिसिर बेसरा के साथ गिरफ्तार उसके करीबी सहयोगी मोछू मुर्मू और गौरव उर्फ बिरेंद्र हांसदा से भी अलग-अलग टीमों द्वारा पूछताछ की जाएगी. जांच एजेंसियां तीनों के बयानों का मिलान कर संगठन की कार्यप्रणाली, संपर्क सूत्रों और नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने की कोशिश करेंगी.
कई राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों की रहेगी नजर
पूछताछ की प्रक्रिया में सिर्फ झारखंड पुलिस ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) जैसी केंद्रीय एजेंसियां भी शामिल रहेंगी. इसके अलावा बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ की विशेष जांच टीमें भी रिमांड अवधि के दौरान मिसिर बेसरा से पूछताछ करेंगी.
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, माओवादी संगठन के पास बड़ी संख्या में ऐसे हथियार मौजूद रहे हैं जो सुरक्षा बलों से लूटे गए थे, जिनमें AK-47, INSAS और SLR जैसी राइफलें शामिल हैं. इसके अलावा जांच एजेंसियां उन संभावित तस्करी मार्गों और अवैध हथियार निर्माण से जुड़े नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं, जिनके माध्यम से संगठन तक हथियार पहुंचने की आशंका है.













