रांची: झारखंड की राजधानी रांची स्थित जयपाल सिंह स्टेडियम इन दिनों प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों के आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में बड़ी संख्या में छात्र लगातार धरना दे रहे हैं. गुरुवार को प्रदर्शनकारियों ने लोक भवन के बाहर भी जोरदार प्रदर्शन किया और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई.
आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार गंभीरता से निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका धरना जारी रहेगा.
विवादित परीक्षाओं की CBI और ED से जांच की मांग
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का आरोप है कि टीडीपीएल (TDPL) एजेंसी से जुड़े मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी की भूमिका वाली कई भर्ती परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं. छात्रों की मांग है कि पीजीटी, माध्यमिक शिक्षक, फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSO) सहित सभी विवादित परीक्षाओं की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कराई जाए. साथ ही फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से 90 दिनों के भीतर जांच पूरी कर आवश्यक कार्रवाई की जाए और यदि अनियमितता साबित होती है तो संबंधित परीक्षाएं रद्द की जाएं.
JPSC और JSSC में प्रशासनिक बदलाव की मांग
अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोगों की कार्यप्रणाली में भरोसा बहाल करने के लिए JPSC और JSSC के सभी स्तरों पर अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला किया जाना चाहिए. उनकी जगह ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति हो जिनकी निष्पक्ष छवि हो और जिनका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध न रहा हो. साथ ही उनकी जवाबदेही भी स्पष्ट रूप से तय की जाए.
OMR शीट में ‘Option E’ जोड़ने का प्रस्ताव
अभ्यर्थियों ने OMR आधारित परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ‘Option E’ (Not Attempted) जोड़ने का सुझाव दिया है. उनका कहना है कि यदि कोई अभ्यर्थी किसी प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहता है तो उसके लिए अलग विकल्प उपलब्ध होना चाहिए और उसे भरना अनिवार्य किया जाए, ताकि उत्तर पुस्तिकाओं में किसी भी तरह की छेड़छाड़ या विवाद की संभावना कम हो सके.
उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल उपलब्धता
छात्रों ने मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की मैनुअल जांच कराने की मांग की है. साथ ही मूल्यांकन पूरा होने के सात दिनों के भीतर जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं को अभ्यर्थियों की OTR आईडी पर ऑनलाइन उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है. उनका कहना है कि इससे अभ्यर्थियों को सूचना के अधिकार (RTI) या न्यायालय का सहारा लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी.
आयोग की ओर से समयबद्ध स्पष्टीकरण की मांग
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि किसी भर्ती विज्ञापन या नियमावली को लेकर कोई भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है तो आयोग के संबंधित अधिकारी 24 घंटे के भीतर प्रेस वार्ता कर स्थिति स्पष्ट करें और छात्रों की शंकाओं का समाधान करें.
मुख्यमंत्री से जवाबदेही तय करने की मांग
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओं का कहना है कि कार्मिक विभाग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास है, इसलिए भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जवाबदेही भी उन्हीं की बनती है. उनका कहना है कि यदि सरकार छात्रों की मांगों पर बातचीत नहीं करती और उचित समाधान नहीं निकालती, तो मुख्यमंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ देना चाहिए.













